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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

वासनासंपरित्यागे यदि यत्नं करोषि च । तत्ते शिथिलतां यान्ति सर्वाधिव्याधयः क्षणात् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार शरत्‌-काल में शाखाओं के विस्तारो से गहन तथा फल और पल्लवो से शोभित होकर पृथ्वी शस्य-सम्पत्ति से (हरियाली से) बढ़ जाती है, वैसे ही यह जीव- संसृतिलता उससे यानी उक्त शरीर से अत्यन्त बढ़ जाती है