Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यच्चिन्तयसि यद्यासि यत्तिष्ठसि करोषि च ।
तत्र तत्र स्थिता संवित्संविदेव तदेव सा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : राघव, लिंगदेह में प्रच्छन्न (छिपे हुए) चित्र विचित्र अनन्त कार्यो के
उत्पादक शुभाशुभ कर्म ही जिसके बड़े-बड़े अंकुर हैं, वह शरीर ही जीव-सृष्टिरूपी लता की बीज है,
यह आप जानिए