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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 89

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 89 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 89

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कब किस प्रकार उत्थित हुआ ? उसे कहते है । बार-बार संकल्प करके जब संवित्‌ अपना संकल्पमय स्वरूप प्राप्त कर लेती है, तब वही इस जन्मजात की बीजता को प्राप्त हो जाती है