Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 88
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 88 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 88
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
चिदात्मा स्वयं ही अपने मिथ्याभूत बन्ध और मोक्ष की कल्पना करता है, ऐसा कहते हैँ ।
जैसे काल पाकर बीज महान् वृक्ष होकर आकाश को व्याप्त कर लेता है, वैसे ही यह अपने संकल्प
से ही उत्पन्न हुआ असत् विषय-समूह काल पाकर चिदाकाश को व्याप्त कर लेता है