Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
वासनाक्षयविज्ञानमनोनाशा महामते ।
समकालं चिराभ्यस्ता भवन्ति फलदा मुने ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हिरण्यगर्भ की चिति की जगदाकारता भी समष्टि-प्राण के परिस्यन्दन से ही युक्त होती है, यह
बात अपने चित्त के स्यन्दन के कुष्टान्त से लक्षित होती है, यह कहते हैं।
यह प्राण-प्रस्पन्दन-स्वरूप ही इस प्रकार का जगत् नामधारी पदार्थ चित्त के द्वारा उस प्रकार
लक्षित होता है, जिस प्रकार आकाश में नीलत्व आदि लक्षित होते हैं