Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तत्त्वज्ञानं मनोनाशो वासनाक्षय एव च ।
मिथः कारणतां गत्वादुःसाध्यानि स्थितान्यतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उसका भी बीज क्या है, इस तृतीय प्रश्न का उत्तर देते हैं।
राघव अनेक तरह की वृत्तिर्या धारण करनेवाले चित्त रूपी वृक्ष के दो बीज हैं एक प्राण परिस्पन्द
ओर दूसरा दृढ वासना