Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यावन्न तत्त्वविज्ञानं तावच्चित्तशमः कुतः ।
यावन्न चित्तोपशमो न तावत्तत्त्ववेदनम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
रघुश्रेष्ठ, जिस प्रकार मुमूर्षु मरणासन्न पुरुष के उत्पात प्रदर्शनसंकल्प से युक्त चित्त से ही झरोखे
आदि से युक्त तथा सुन्दर आकारवाला गन्धर्व नगर उत्पन्न होता है, वैसे ही तत्-तत् शरीरसंकल्प
से युक्त चित्त से ही तत्-तत् शरीर उत्पन्न होते हैं