Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 107
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 107 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 107
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जहाँ विभिन्न-विभिन्न पदों को देनेवाली विभाग कल्पना नानारूपता का कारण
देखी जाती हे, वहाँ वह पावन पद कैसे हो सकता है ?