Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
संसुप्तान्तरबोधाय संवित्संतिष्ठते यदा ।
लब्धं भवति लब्धव्यं तदा तदमलं पदम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरे अरूप मनोनाश का दिग्दर्शन कराते हैं।
हे रघुकुलभूषण, जो मेने पहले अरूप मनोनाश कहा था, वह विदेहमुक्त का ही विषय है तथा
अवयवादि विकारों से वर्जित है