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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

संवित्समुदितैवाशु याति संवेद्यमादरात् । संवेदनादनन्तानि ततो दुःखानि चेतसः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

संतोषरूपी शीतलता के आश्रय, सत््वनामक जीवन्मुक्तस्वरूप मनोनाश-दशा में गुणरूपी सम्पत्तियाँ उस प्रकार प्रस्फुरित होती है, जिस प्रकार हिमालय में वसन्त ऋतु में मंजरियाँ प्रस्फुरित होती हैं