Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विद्युन्मञ्जरितोपान्तनीलनीरदपल्लवम् ।
सर्वर्तुरम्यचन्द्रार्कगणरम्यकदन्तुरम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : भगवन्, आत्मा ओर अनात्मा के विचार से महामुनि वीतहव्य के बाधित हुए
अन्तःकरण-स्वरूप में मेत्री आदि गुण उत्पन्न हुए, आपके इस कथन का क्या अभिप्राय है ?