Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चित्तादिदमुदेत्युच्चैः सदसच्चाङ्गजालकम् ।
तथा चैतत्स्वयं स्वप्नसंभ्रमेष्वनुभूयते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे प्रश्नवेत्ताओं में श्रेष्ठ रघुकुलवाहक श्रीरामजी, मैंने तामसेवसिना-
जालैः" इत्यादि पूर्व वाक्य से चित्त की सत्ता का स्वरूप बतलाया है। अब आप इसके विनाश का स्वरूप
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