Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 35

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

तब वीतहव्य को क्यो सिद्षियाँ नहीं हुई ? तो इस पर कहते है। आत्मज्ञान की इच्छावाले वीतहव्य ने सिद्धियों की इच्छा से किसी प्रकार का यत्न नहीं किया ओर ज्ञान की इच्छा से तो उसने शीघ्र यत्न किया था । जैसे कि इसने अरण्य में ज्ञानाभ्यास के लिए उद्योग किया था, यह पहले वर्णित हो चुका है