Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 34
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यद्यपि तत्त्ववेत्ता इच्छा से वर्जित है, तथापि वह यदि कौतुकवश यत्नानुष्ठान करे, तो उसे
आकाशगमन आदि सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती ही हैं, इस आशय से कहते हैँ ।
चाहे तत्त्वज्ञ हो चाहे अतत्त्वज्ञ हो, जिसकी जिस प्रकार इच्छा उदित होगी, वह उस प्रकार से उसी
इच्छा से यत्न करता है ओर समय आने पर वह उस सिद्धि को प्राप्त करता है