Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
विदेहमुक्तविषये तस्मिन्सत्त्वक्षयात्मके ।
वित्तनाशे विरूपाख्ये न किंचिदपि विद्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जो देवता आदि की स्वतः आकाशगमन आदि सिद्धिर्हि, यह वस्तु स्वभाव ही है, अतएव उनमें वे
उत्पत्ति से लेकर जीवनपर्यन्त ही हैं, ऐसा कहते है।
देवता आदि में जो आकाशगन आदि सिद्धिर्यौ हैं, वह वस्तुस्वभाव ही है । दूसरे किसी से वे नहीं
आती जैसे चन्द्रमा शीतलता का परित्याग नहीं करता, वैसे ही नियति का (स्वभावका) परित्याग कोई
नहीं कर सकता