Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
संप्रत्येवानुभूतत्वात्सत्त्वाप्त्या तन्वसंयुतः ।
सरूपोऽसौ मनोनाशो जीवन्मुक्तस्य विद्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अपने जीवन ओर मरण की आसक्ति से
वर्जित तत्त्वज्ञ पुरुष आकस्मिक प्राप्त हुए सुख और दुःख से अपनी स्वाभाविक तृप्ति का परित्याग नहीं
करता