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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

संकल्पमेव तन्मन्ये संकल्पोपशमेन तत् । शोषयामि यथा शोषमेति संसारपादपः ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

मन का भी रहस्य मुझे ज्ञात है, यह कहते है। मैं संकल्प को ही मन समझता हूँ, उस मन का संकल्प के उपशमन द्वारा शोषण करता हूँ, जिससे कि यह संसाररूपी वृक्ष शोष को प्राप्त होता है