Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
कोऽसौ स्वर्गोऽस्ति भूमौ वा पाताले वा प्रदेशकः ।
न यत्राभिभवन्त्येता दुर्भ्रमर्य इवापदः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
न ह वै सशरीरस्य सतः प्रियाप्रिययोरपह॒तिरस्ति
(शरीरधारी प्राणी के प्रिय एवं अप्रिय का वारण नहीं होता है)
इस श्रुति के अनुसार तथा स्वर्गवासि्यो की भी असुर आदि से पीडा के श्रवण से स्वर्ग में दुःख का
असम्बन्ध भी असम्भव है, इस आशय से कहते है ।
भूमि अथवा पाताल में स्वर्ग नाम का कोन सा प्रदेश है, जहाँ दुष्ट भँवरियों की भाँति ये आपत्तियाँ
अभिभूत नहीं करती ?