Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
स्वस्थो भव भवोदारः समो भव सुखी भव ।
सर्वगस्त्वं त्वमात्मैव तव नास्ति पुनर्भवः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
लिंग शरीर में प्रतिबिम्बित जीवभूता चिति स्वबिम्बभूत
चैतन्य-समुद्र में जा मिली । त्वचा-असृक्, मांस आदि धातु अपने उपादानभूत धातु में मिल गये ।
महामुनि के विश्रान्त हो जाने पर सब अपने-अपने उपादानों में ही अवस्थित हो गये