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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

अविद्यामपि ये युक्त्या साधयन्ति सुखात्मिकाम् । ते ह्यविद्यामया एव नत्वात्मज्ञास्तथाक्रमाः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

इससे भी यही वह जगत्‌ था, ऐसा कहते हैं। हम लोगों के चक्षु आदि से दिखलाई पड़ रहे मुनि वीतहव्य हम लोगों के मनोमात्रस्वरूप ही हैं, क्योंकि हम लोगों का मन ही "अहम्‌" और “त्वम्‌' के रूप में मानों बसता है, मन ही यह समस्त जगत्‌ है, अतः उसमें अन्यत्व और अनन्यत्व क्या होगा ? वन्ध्या के भेद से उसके पुत्रो मे करीं भेदन हो सकता है ? नहीं हो सकता