Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
प्रतिभातं ततस्तेजो निमेषार्धं विचार्य सः ।
जहौ बभूव च तदा न तमो न प्रकाशकम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उस समय व्युत्थान दशा मेँ भी समाहित
स्थितिवाले सिद्ध, महान् तपस्वी, भगवान् वीतहव्य ने जीवन्मुक्त स्वरूप से चिरकाल तक यत्र-तत्र
विचरण किया