Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ततो जहौ तमोमात्रं प्रतिभातमिवाम्बरे ।
उत्तिष्ठत्प्रस्फुरद्रूपं प्राज्ञः कोपलवं यथा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार विचार कर वह
ध्यान में छः दिन तक फिर बैठ गये । तदनन्तर उस प्रकार प्रबोध को प्राप्त हुए, जिस प्रकार क्षणभर में
सोया हुआ पथिक प्रबोध को प्राप्त होता है