Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अचिन्मयं चिन्मयं च नेति नेति यदुच्यते ।
ततस्तत्संबभूवासौ यद्गिरामप्यगोचरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तब पहले हम लोगों में तुम्हारे ऊपर आक्रमण करने की सामर्थ्य कहाँ से थी ? तो आत्मा के साथ
तादात्म्य आदि के अध्यास से थी, ऐसा कहते हैं।
हे इन्द्रियगण, "हम आत्मा हैं" इस प्रकार की जो यह तुम लोगों को वासना हुई थी, वह आत्मतत्त्व की
विस्मृति से उस प्रकार उत्पन्न हुई , जिस प्रकार रज्जु तत्त्व की विस्मृति से रज्जु में सर्पवासना उत्पन्न
होती है