Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

संपन्नाः काकतालीयात्स्वशक्तिनियतेन्द्रियाः । तथैव कलिका लोलं केव कस्यात्र खण्डना ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्य भगवान्‌ के गण पिंगल ने आकाश का परित्याग कर लतागृह ओर कुंजर से सुन्दर तथा वर्षाकाल में मत्त मेघो से युक्त आकाश की नाई दैदीप्यमान विन्ध्याचल के अरण्य को प्राप्त किया