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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

इत्थं यथेह सामग्र्या स्वशक्तिस्थपदार्थया । संपन्ना काकतालीया दृढा वरगृहाकृतिः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्य के द्वारा अत्यन्त मानपूर्वक आज्ञा को प्राप्त हुए उक्त वीतहव्य मुनि ने विन्ध्याद्रि की गुफा की ओर जा रहे अग्रगामी पिंगलनामक गण के शरीर में प्रवेश किया