Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तदेवात्मानुसंधानमत्यजन्सममिन्द्रियैः ।
चेतसा कलयामास दृष्टलोकपरावरः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, तदनन्तर
समाधि में उक्त मुनि ने अपनी वीतहव्य नामक मन को आत्मा का एक चमत्कारमात्र ओर परिच्छिन्न
ब्रह्मस्वरूप समझ लिया