Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
भवन्तोऽन्ये वयं चान्ये ब्रह्मान्यत्कर्तृतापरा ।
अन्यो भोक्तान्य आदत्ते को दोषः कस्य कीदृशः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद सूर्य ने क्या किया ? उसे कहते हैं।
आकाश के मध्य में संचरण करनेवाले सूर्य भगवान् ने मुनि वीतहव्य के अभीष्ट को जानकर पृथ्वी
से मुनिशरीर का उद्धार करने के लिए अपने अग्रगामी पिंगलनाम के गण को आदेश दिया