Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 42
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जब तक इस प्रकार के जगत् को संविन्मात्र स्वरूप नहीं जान लेते, तब तक वह
वज्रसार की नाई अत्यन्त दृढ़ रहता हे । और ज्ञात हो जाने पर त्रिकालाबाधित परम चिदाकाश-स्वरूप
हो जाता है