Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 41
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जैसे यह भूत, भविष्यत् ओर वर्तमान् जगत् है, वैसे ही दूसरा भी
जगत् हे । समस्त दृश्यभूत जगत् संविन्मात्ररूप से अवशिष्ट जो मन है, तत्स्वरूप ही है अतिरिक्त नहीं
हे