Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 29
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : हे मुनिवर, ऐसी स्थिति होने पर तो जीवन्मुक्त पुरुष के अन्तःकरण में भी बन्ध
ओर मोक्ष की दृष्टियाँ होती है , यह मानना पड़ेगा, जैसे कि मुनि वीतहव्य के अन्तःकरण में हुई