Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
बभूवतुः स्वकार्यैकतत्परौ तेजसां निधी ।
जगाम पिङ्गलो व्योम मुनिश्च विमलं सरः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
उन्हीं दो हेतुओं से
समस्त वासनाओं से वर्जित इस महामुनि वीतहव्य ने हृदयस्थ संविदाकाश में अनेक तरह के लोकों का
अनुभव किया