Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
दृष्ट्वासौ चिन्तयन्कार्यं पौर्वापर्यमुदारधीः ।
विन्ध्यभूधरभूकोशमन्तर्मुनिकलेवरम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर तीन सौ वर्षो के बीत जाने पर पृथ्वी के कोटर में संश्लिष्ट
वे स्वयं ही निग्रहानुग्रहसमर्थ तथा आत्मस्वरूपता को प्राप्त हुए महामुनि समाधि से जाग गये