Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
परिस्फुरत्यपर्यन्ता हृदयोन्मूलनोद्यता ।
आक्रन्दकारिणी क्रूरा भावाभावविषूचिका ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
महामुनि वीतहव्य नें उस पर्णकुटी में अपने द्वारा बिछाये गये सम और शुद्ध मृगचर्म के
आसन के ऊपर उस प्रकार विश्रान्ति ली, जिस प्रकार बरस चुका मेघ तापशून्यपर्वत के ऊपर विश्रान्ति
लेता हे