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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 72

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 72 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 72

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जो सम हैं, उनका यानी क्षीर और क्षीर का, जो अर्धसम हैं, उनका यानी क्षीर ओर नीर का भी परस्पर सम्बन्ध देखा गया है। परन्तु जो विलक्षण हैँ यानी अग्नि और जल की नाई अत्यन्त विरुद्ध हैं, उनका सम्बन्ध नहीं हो सकता, क्योकि विरोधियों का जमघट होने पर तो एक का विनाश ही देखा जाता है, सम्बन्ध का अवस्थान नहीं देखा जाता