Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 64
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, कार्यकरणसंघात के अभिमान से “इस आत्मा का मैं
उपकार करता हूँ” इस भ्रम से तुम परिच्छिन्न बुद्धि को पीडित करते हो संघात में रहनेवाले पाँच प्राण,
मन, बुद्धि ओर दस इन्द्रिय सभी अचेतन होने के कारण उनका भोगों से कुछ प्रयोजन नहीं है, इसलिए
किसी का किसी के लिए कुछ भी उपयोग नहीं होता, यह भाव हे