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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 63

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 63

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि मोह से जीवरूपता को प्राप्त हए अशनाया आदि से पीड्यमान ईश्वर की मैं उपेक्षा कैसे कर सकता हूँ अतः उसके लिए अनेक प्रयत्नो से संघटित हो रहा मेँ ईश्वर के विषय में शोक करता हूँ, तो इस पर कहते है । जो तुम्हारे सदृश होगा, उसी के लिए तुम्हें शोक करना चाहिए, ईश्वर तो तुम्हारे सदृश है नहीं, अतः उसका क्या शोक करोगे । क्योकि न तो उसका कोई कृत कर्म से ही यहाँ प्रयोजन है और न कोई अकृत अकर्म से ही प्रयोजन है