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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

पश्य त्वयि सति भ्रान्तजलकल्लोलसंकुलाः । विशन्ति कालजलधिं संसारसरितां गणाः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

केवल निर्विकल्प समाधि से प्राप्त होनेवाले उदार परब्रह्म को जानने की इच्छा से ही उक्त महामुनि ने जगत्‌-रूपी जीर्ण-शीर्ण अपने व्यापारो की परम्परा का उपसंहार कर लिया यानी उन्होने संन्यास ग्रहण कर लिया