Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 49
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे मूढ यदि तुम आत्मतत्त्व के परिज्ञान से चिन्मय हो जाओगे, तो चिद्भेद सम्पादक कारण के न
रहने से तुम उस परम पद से निरन्तर अव्यतिरिक्त स्वरूपवाले ही हो जाओगे, फिर किस विषय में तुम
शोक करते हो