Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
संशान्तवासनमनाश्रितचेतनांशमप्राणसंचरणमस्तमितांशदोषम् ।
संवेद्यवर्जितमुपेत्य सुसंविदंशं शाम्यामि मौनमहमेव निरीहमन्तः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्राह्मीशक्ति से यानी
चितिशक्ति से युक्त माया ही मनुष्य, देवता ओर समस्त जगत्रूपों से आविर्भूत हे । ओर तत्-तत्
रूपों से वह ऐसी गरजती है, जैसे समुद्र के तरगों के कलोलों से संवलित तट गरजता हो