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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verses 40–41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verses 40–41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

प्रकाशेन प्रयात्यन्तमनालोकोऽभवत्तमः । अनिच्छतोऽपि ते साधो विचारे स्थितिमागते ॥ ४० ॥ सर्वतोऽयमुपायातो विनाशः सुखसिद्धये । तस्मान्नास्त्यसि निर्णीतमिति सिद्धान्तयुक्तिभिः ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसकी शक्ति से जिसका हनन किया जाता है, वह उसी के द्वारा हत कहा जायेगा, पुरुष की शक्ति से तलवार हनन करती हे, हनन करनेवाला पुरुष ही कहा जाता हे