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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 37

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

विवेकस्य प्रसादेन विवेकाय नमो नमः । बहुधापि प्रबुद्धस्त्वं चित्तकाप्यनुबोधितः ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे चित्त, यह तुम अपने आप ही जडभूत हो, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं हे । भला बतलाओ तो सही, जड में केसे कर्तापन रह सकता है ? क्या यहाँ पत्थर की मूर्तियाँ भी किसी प्रकार नाच सकती है ?