Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तेन मिथ्यैव जीवामीत्याशया मा सुखी भव ।
पूर्वमेवासि नास्त्येव यावद्भ्रान्त्या त्वदस्तिता ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, दुःख का विषय है कि भोग के उत्तरक्षण में
विषय में पर्यवसित होनेवाली और भोगकाल में अमृत के समान उत्थित यह तुम्हारी कर्तृत्व, भोक्तृत्व
की आशंका (अभिमानिता) व्यर्थ ही है