Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
भाव्यते भरिताकारं वपुरानन्दमन्थरम् ।
न भवत्यसुसङ्गानामाशापाशविधायिनाम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सर्पो से डरा हुआ पथिक उनसे दूर रहता है चाण्डालो से डरा हुआ ब्राह्मण चाण्डालो
से दुर रहता है, वैसे ही चिदेकरसस्वरूप दोषशून्य प्रत्यगात्मा इन्द्रियों से दूर रहता है