Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
संविदः स्फुटतामन्तरायान्त्यज्ञानसंक्षये ।
संविदंशैकविश्रान्तं समग्रं सचराचरम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस सर्वावभासक साक्षीस्वरूप प्रत्यगात्मा ने चक्षु आदि इन्द्रियों के स्वरूप का भली प्रकार परिज्ञान
कर लिया है, उस प्रत्यगात्मा के साथ उनका तनिक भी वैसे समबन्ध नहीं हे, जैसे स्वर्ग ओर पाताल
तल में विद्यमान पर्वतो का परस्पर सम्बन्ध नहीं है अथवा पाताल के पर्वतो के साथ स्वर्ग का सम्बन्ध
नहीं हे