Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
त्वयि त्वसति हे साधो सर्वा एव शुभश्रियः ।
प्रभात इव पद्मिन्यः सालोकं विलसन्त्यलम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
मन घट से पट के ऊपर ओर पट से उत्कट शकट के ऊपर कूद जाता है यों यह
चित्त अर्थो के ऊपर उस प्रकार दौडता है, जिस प्रकार वृक्षों के ऊपर बन्दर दोडता है