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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

हृदयावकरं कीर्णमितश्चेतश्च कर्कशः । अपवित्रो दुराचारः कुरुते कामकुक्कुटः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त आश्चर्य की बात है कि यह मन इतना चंचल हे । क्षणमात्र के लिए किसी एक निश्चित विषय में लगाया हुआ भी उस प्रकार स्थिरता को प्राप्त नहीं होता, जिस प्रकार तरंगो के द्वारा बहाया गया पत्ता स्थिरता को प्राप्त नहीं होता