Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
एवं हि चित्तं नास्त्येव ब्रह्मैवास्ति तथात्मकम् ।
पदार्थभावनाश्चित्तात्तेनासत्या मयोज्झिताः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे नेत्र, जो उत्पन्न होकर विनष्ट हो जाता है ओर जो केवल ऊपर-ऊपर से ही रमणीय प्रतीत
होता है, ऐसे असत्-स्वरूप रूप का(सौन्दर्य का) उस अवश्यम्भावी मृत्यु के मुख में प्रवेश करने के
लिए आश्रय मत करो