Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verses 34–36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verses 34–36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 34
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
भाग्यवश
चित्त निस्तत्त्व है, यह मैंने आज स्वयं जान लिया।
बोध के अनन्तर जीवन्युक्तों को चित्तशून्य होकर ही अवशिष्ट आयु का क्षेपण करना उचित है,
यह कहते हैं।
अतः शठ मन के साथ अपने समस्त जीवन का क्षेपण नहीं करना चाहिए ॥ ३ ३॥ काम, क्रोध, लोभ
आदि शठो के उत्सवभूत मन को देहरूपी घर से क्षणभर में निकालकर मैं वैताल से शून्य होकर भीतर
से स्वस्थ होकर अवस्थित रहता हूँ