Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
मृतेऽपि मनसीयं में विकल्पश्रीर्निरर्थिका ।
मनोवेतालवृत्त्यर्थं किमर्थमुपजायते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान के विनाश से क्षीण हुए मन में फिर ये रूप, प्रकाश ओर मनस्कार परस्पर एक
दूसरे से कोई भी संघटित नहीं होते