Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
विचाराकारको मौर्ख्यादहमासं मितस्थितिः ।
विचारेणामिताकारः क्व नामाहं विचारकः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मकड़ी के जाले के समान आप ने ही बन्धन में हेतुभूत अपने चित्त
के संकल्प विकल्पात्मक तन्तु मन्द और मध्यम अधिकारी के लिए वैराग्य, शम, दम, विरोध आदि रूप
मनोभ्यास से यत्नपूर्वक किये गये विचार से विनष्ट हो जाता है। और उत्तम अधिकारी के लिए सहसा
उत्पन्न नित्य अनित्य विज्ञान से उस तन्तु के विच्छिन्न हो जाने पर स्वभावतः ही अज्ञान भावना प्रवृत्त
नहीं होती